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हम यहां कैसे पहुंचे
छोटी शुरुआत से लेकर वैश्विक उपस्थिति तक हमारी यात्रा शुरू हुए 65 वर्ष से अधिक हो गये हैं.

महिन्द्रा और एक स्वतंत्र भारत ने उत्थान यात्रा की शुरुआत एक साथ की. 1945 में दो उद्यमी भाइयों, जे.सी. महिन्द्रा और के. सी. महिन्द्रा ने गुलाम मोहम्मद साथ मिलकर मुम्बई में महिन्द्रा एंड मोहम्मद नामक स्टील कम्पनी की शुरुआत की. दो साल बाद, भारत को आज़ादी मिली तो गुलाम मोहम्मद ने कम्पनी छोड़ दी और पाकिस्तान के पहले वित्त मंत्री बने और महिन्द्रा भाइयों ने कम्पनी के विकास को तेजी देने के लिए मुम्बई में विलीज़ जीप का निर्माण करने का निर्णय किया. और कम्पनी का नाम? महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, और क्या.
महिन्द्रा भाइयों का विश्वास था कि यातायात के नये साधन भारत की समृद्धि की कुंजी हो सकती है, इसलिए उनके पहले उद्देश्यों में से एक था भारतीय स्थलाकृति पर दौड़ने में सक्षम म़ज़बूत, सीधे सादे वाहनों का निर्माण. वैश्वीकरण के आरंभिक पुरोगामी बनते हुए दोनों भाइयों ने कई अन्तरराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ गठजोड़ किया और देखते ही देखते महिन्द्रा की पहुंच का विस्तार इस्पात, ट्रैक्टर, दूरसंचार, व और भी बहुत कुछ तक हो गया.
आज 67 वर्षों के बाद एक छोटी, स्थानीय कम्पनी से बढ़कर महिन्द्रा यूएस 15.9 बिलियन का कॉर्पोरेशन हो गया है जिसके पूरी दुनिया में 155,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं. आज तक यह सफर बेहर रोमांचकारी रहा है और अपने यूटिलिटी वाहनों, ट्रैक्टरों और दूरसंचार प्रौद्योगिकी में अपने वैश्विक नेतृत्व पर और साथ ही वित्तीय सेवाओं, छुट्टियों और आतिथ्य सत्कार, इंजीनियरिंग, व्यापार और संभार तंत्र में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति पर हमें गर्व है. हम जैसे-जैसे 21वीं सदी में आगे बढ़ेंगे, हम ऐसे अनोखे विचारों की खोज जारी रखेंगे जिससे लोग उन्नति करने में सक्षम हो सकेंगे. हम वैसे तो आफी आगे आ चुके हैं, पर सही मायनों में सफर तो अभी शुरू ही हुआ है.

